सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

“हर दिन, हर रात” गीत– अमन श्रीवास की रचना

प्रेम—यह एक ऐसा संसार है जहाँ शब्दों की आवश्यकता कम पड़ जाती है और एहसास अक्सर अनसुने रह जाते हैं। कभी प्रतीक्षा में बिताए दिन साक्षी बनते हैं, तो कभी रातें एकांत का बोझ उठाती हैं। बहुत-सी रचनाओं में प्रेम की कसक और तड़प दिखाई देती है, मगर कुछ पंक्तियाँ इतनी सच्ची और दिल से निकली होती हैं कि वे सीधे पाठक के अंतर्मन को छू जाती हैं। प्रस्तुत गीत भी प्रेम की उसी यात्रा का चित्रण है—एक ऐसा भावनात्मक अनुभव जो इंतज़ार, समर्पण और जीवन के हर सांस में बस चुके किसी एक चेहरे का वर्णन करता है।


गीत: “हर दिन, हर रात” – अमन श्रीवास की रचना

हर दिन, हर रात
हर दिन, हर रात तेरे इंतजार में मैंने गुज़ारे,
अब रह नहीं सकता हूँ मैं बिन तुम्हारे,
अब रहा नहीं है बस में ये दिल हमारे,
हो गया है कब से ये तुम्हारे हवाले।

तुम मिल जाओ बस अब यही है ख़्वाब हमारे,
बाहों में भर लो अपनी, और कह दो हम भी हैं तुम्हारे,
अपनी आख़िरी साँस तक रहना तुम साथ हमारे,
जुदा न होना हमसे चाहे जो हो जाए।

हर दिन, हर रात तेरे इंतजार में मैंने गुज़ारे,
अब रह नहीं सकता हूँ मैं बिन तुम्हारे,
अब रहा नहीं है बस में ये दिल हमारे,
हो गया है कब से ये तुम्हारे हवाले।

रात के साए भी अब लगते हैं रोशन साथ तुम्हारे,
दिन की हर धड़कन में बसते हैं एहसास तुम्हारे,
हर लम्हा, हर साँस में सिर्फ़ नाम होता है तुम्हारा,
तू ही है वो जिससे आबाद है संसार हमारा।


विश्लेषण: प्रेम की गहराइयों में उतरती पंक्तियाँ

इस रचना में प्रेम केवल एक भावना भर नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण समर्पण के रूप में उभरकर सामने आता है। कवि का हृदय प्रेम के सामने पूर्णतः समर्पित है—वह इंतज़ार को भी पूजा की तरह निभाता है और मिलन को स्वप्न के रूप में देखता है।

गीत में कई भावनात्मक परतें दिखाई देती हैं—

  • तड़प: “हर दिन, हर रात तेरे इंतजार में…”

  • असमर्थता: “अब रहा नहीं है बस में ये दिल हमारे…”

  • पूर्ण समर्पण: “हो गया है कब से ये तुम्हारे हवाले…”

  • अनंत साथ का वचन: “अपनी आख़िरी साँस तक रहना तुम साथ हमारे…”

इन्हीं भावों के माध्यम से यह कविता प्रेम की उस स्थिति को व्यक्त करती है जहाँ व्यक्ति स्वयं को खोकर भी पूर्ण महसूस करता है।


निष्कर्ष — प्रेम का अनवरत प्रवाह

“हर दिन, हर रात” केवल एक गीत नहीं, बल्कि उन सभी दिलों का प्रतिनिधित्व है जो प्रेम में प्रतीक्षा को अपनी नियति और समर्पण को अपना धर्म बना लेते हैं। यह रचना बताती है कि किसी का इंतजार कितना भी लंबा क्यों न हो, यदि दिल में विश्वास और भावनाओं में सच्चाई हो, तो प्रेम हमेशा अपना रास्ता ढूँढ़ ही लेता है।

यह कविता और इसकी अनुभूतियाँ पाठक को यह याद दिलाती हैं कि सच्चा प्रेम केवल मिलन में नहीं, बल्कि उस अनकही चाहत में भी मौजूद होता है जो हर दिन, हर रात दिल में धड़कती रहती है।

टिप्पणियाँ

Popular

10 Unique 4-Line Shayari to Express Heart-Touching Love

Love is a feeling that touches the deepest corners of the heart. Sometimes, words fail to capture its essence, but Shayari—poetry in its most tender form—manages to say everything we feel. Whether you are in love, missing someone, or cherishing beautiful memories, these 4-line heart-touching Shayaris will speak to your soul. Each couplet is unique and carefully crafted to reflect the beauty, pain, and purity of true love. 1. Silence That Speaks Tere bina zindagi mein kya hai baaqi, Har khushi mein bhi lagti hai udaasi. Tere saath jo guzra tha ek pal bhi, Us pal ki yaadon mein hai pyaasi zindagi. 2. Love Beyond Distance Door rehkar bhi tu paas lagta hai, Har pal tu mera saath lagta hai. Jitna sochun tujhe bhool jaane ka, Utna hi tera ehsaas gehra lagta hai. 3. Eyes That Confess Teri aankhon mein chhupi jo baat hai, Mere dil ke har jazbaat ki saugaat hai. Tu kuch bhi na bole to bhi samajh loon, Teri khamoshi mere liye ek raaz hai. 4. Unspoken Love Jo kaha nahi, woh b...

Golden Quill Award 2025: When Words Turn Into Wonders

There are moments in life when silence finds its voice — in a story, in a poem, in a single line that feels like truth. The Golden Quill Award 2025 , presented by Artist Press Publication House , was one such moment. A celebration not just of literature, but of human experience, emotion, and expression . This year’s event was not just a competition. It was a gathering of souls — people who love words, live by words, and share their hearts through them. 🖋️ What Is the Golden Quill Award? The Golden Quill Award is an annual literary honor that recognizes outstanding writers and poets across India. But it goes beyond trophies or titles — it’s about recognizing passion, pain, healing, memory, and imagination . Hosted by Artist Press Publication House , this award opens its doors to all kinds of writers — students, scholars, doctors, homemakers, lawyers, first-time poets, and lifelong storytellers. With an open theme and no language restriction , the award focuses on what matters ...

बेटी: एक कविता और समाज को जागरूक करने का संदेश by डॉ. सुर्यशंकर कुमार

"बेटी" एक मार्मिक कविता है जो समाज में बेटियों के महत्व, उनके संघर्षों, और उनके योगदान को उजागर करती है। इसे डॉ. सुर्यशंकर कुमार द्वारा लिखा गया है, जो एक प्रतिष्ठित फिजियोथेरेपिस्ट और समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता हैं। यह कविता न केवल बेटियों की वास्तविकता को दिखाती है, बल्कि समाज के उन पहलुओं पर भी सवाल उठाती है जो बेटियों के साथ भेदभाव करते हैं। कविता: "बेटी" "बेटी हूँ. कोई पाप नहीं, घरवालों का अभिश्राप नहीं। दुर्गा, काली, सरस्वती, लक्ष्मी, वीरता की पहचान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई वाई भी बिटिया ही तो थी। जिन्होंने सबको जन्म दी, वो भी किसी की बिटिया ही तो थी. नौ-माह जिसने गर्भ में हम सबों को पाली, वो भी किसी की बेटिया ही तो थी। कलाई पे जिसने राखी बांधी वो बहना भी तो बेटिया थी। जिसके मांगो में सिंदूर लगाया, सात फेरे लिए वो भी बिटिया ही तो थी, फिर ना जाने क्यों बेटियों को जन्म से पहले गर्भ में ही मार देते। दो. चार और न जाने किस उम्र के बेटियों का बलात्कार करते, ये भूल जाते की जिसने हमारी कलाई पे राखी बांधी वो हमारी बहन हैं, तो जिसके साथ दुर्व्यवहार कर रहा वो भी कि...