भगवान गणेश और चंद्रदेव की कहानी हिंदू धार्मिक कथाओं में एक ऐसी कथा है, जिसमें अहंकार, अपमान, क्षमा और सीख—चारों बातें एक साथ देखने को मिलती हैं। आपने अक्सर सुना होगा कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए । आखिर इसके पीछे क्या कारण है? भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप क्यों दिया था? और इस श्राप का संबंध झूठे आरोप से कैसे जुड़ा है? इस पूरी कथा को समझने के लिए आइए जानते हैं गणेश जी और चंद्रमा की प्रसिद्ध पौराणिक कहानी सरल भाषा में। 🐘 गणेश जी और चंद्रमा की कहानी की शुरुआत एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश ने बहुत सारा भोजन किया। भोजन करने के बाद उनका पेट काफी भर गया था। इसके बाद वे अपने प्रिय वाहन मूषक पर बैठकर कहीं जा रहे थे। रात का समय था और गणेश जी अपने मूषक पर सवार होकर आगे बढ़ रहे थे। तभी रास्ते में मूषक को अचानक किसी चीज़ से डर लग गया। वह घबरा गया और तेजी से इधर-उधर होने लगा। मूषक के लड़खड़ाने के कारण भगवान गणेश का संतुलन बिगड़ गया और वे जमीन पर गिर पड़े। कथा के अनुसार, गिरने से उनका पेट खुलने लगा। गणेश जी ने तुरंत पास में मौजूद एक सर्प को अपनी कमर के...