इंसान हजारों सालों से आसमान को देखकर एक बहुत बड़ा सवाल पूछता आया है— यह पूरा ब्रह्मांड आखिर शुरू कैसे हुआ? आज विज्ञान इस सवाल का जवाब खोजने के लिए टेलीस्कोप, गणित, भौतिक विज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology) का इस्तेमाल करता है। वैज्ञानिकों के पास बिग बैंग सिद्धांत जैसी वैज्ञानिक अवधारणाएं हैं, जो बताती हैं कि शुरुआती ब्रह्मांड कैसा रहा होगा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि हजारों साल पुराने भारतीय वैदिक साहित्य में भी ब्रह्मांड की शुरुआत को लेकर एक ऐसा मंत्र मिलता है, जो इस रहस्य पर गहराई से सवाल उठाता है। इसे नासदीय सूक्त (Nasadiya Sukta) कहा जाता है। यह ऋग्वेद के 10वें मंडल, 129वें सूक्त में मिलता है। इस सूक्त की सबसे खास बात यह है कि यह ब्रह्मांड की शुरुआत का कोई आसान या निश्चित जवाब नहीं देता। इसके बजाय यह पूछता है— सृष्टि की शुरुआत कैसे हुई? उस समय क्या मौजूद था? और क्या वास्तव में कोई जानता है कि यह सब कैसे शुरू हुआ? नासदीय सूक्त क्या है? नासदीय सूक्त ऋग्वेद का एक प्रसिद्ध दार्शनिक सूक्त है। इसमें कुल सात मंत्र हैं। “नासदीय” नाम इसके शुरुआती शब्दों से जुड़ा है, जिसमें “सत” औ...